मारुति सुजुकी बेचेगी 1.45 लाख सीएनजी वाहन, जानिए वजह

शहरी इलाकों पर निगाह... 
80 फीसदी सीएनजी वाहन शहरी इलाकों में बिकते हैं। ग्रामीण इलाकों में यह मांग 20-21 फीसदी है। मारुति के मामले में 38-40 फीसदी वाहन ग्रामीण इलाकों में बिकते हैं। लॉकडाउन के बाद उद्योग की नजर शहरी इलाकों पर रहेगी।

त्योहारों में बढ़ेगी बिक्री, पर सेंटीमेंट पर नजर... 
शशांक बताते हैं कि बिक्री में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। लॉकडाउन के बाद यह जीडीपी में सुधार और ग्राहकों के सेंटीमेंट पर निर्भर करेगी। अगर कोविड-19 वैक्सीन आ जाता है तो सेंटीमेंट में अचानक तेजी आएगी। इसके अलावा, त्योहारी सीजन में ग्राहक खर्च के मूड में होता है। इसलिए आगामी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद है। 

एंट्री लेवल कारों की बढ़ेगी मांग...
डिजिटल इंक्वायरी के आंकड़े देखें तो एंट्री लेवल कारों की मांग बढ़कर 65 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पहले 55 फीसदी थी। लॉकडाउन के बाद एंट्री लेवल कारों की मांग में तेजी देखने को मिलेगी। 

रनिंग कॉस्ट बड़ा कारण...
शशांक ने कहा, सीएनजी वाहनों की बिक्री बढ़ने का कारण पेट्रोल-डीजल के मुकाबले रनिंग कॉस्ट करीब 2.5 गुना कम होना है। पेट्रोल-डीजल वाहनों पर प्रति किलोमीटर रनिंग कॉस्ट 4 रुपये आती है, जबकि सीएनजी वाहनों पर खर्च 1.5 रुपये है।